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रविवार, 28 अक्टूबर 2012

बिग-बिग

असीम अपने आन्दोलन की शायद एक और कीमत चुकाएं
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया की धमकी के दबाव में आकर कलर्स चैनल ने कहा है कि वे असीम को इस हफ्ते बिग-बास हाउस से निकाल देंगे। आखिर किस बात का विरोध कर रहे हैं ये राजनैतिक दल?
असीम का व्यवहार बिग-बास के घर में भी बेहद सराहनीय रहा है और वहां रह रहे सभी कंटेस्टेंट असीम का सम्मान करते हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नवजोत सिंह सिद्धू ने तो असीम को 24 कैरेट खरा सोना तक कह दिया। पिछले 18 दिनों में असीम ने रियलिटी शो में कोई ऐसा कार्य नहीं किया है जिससे राष्ट्र या किसी विशेष बिरादरी का अपमान होता हो। असीम ने बिग-बास के मंच को अपने आन्दोलन को जनता तक पहुचाने के लिये ही इस्तेमाल किया है। बिग-बास के घर में जाने से पहले ही असीम ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे मनोरंजन करने के इरादे से नहीं बल्कि लोगों के बीच भष्टाचार के खिलाफ एक अलख जगाने के लिये बिग-बास हाउस जा रहे हैं।
कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को इससे पहले भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिये परेशान किया जा चुका है। महाराष्ट्र हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा असीम पर देश-द्रोह का मुकदमा लगाए जाने और उन्हे गिरफ्तार करने के लिये सरकार को लताड़ भी लगाई थी। इससे पहले कुछ आपराधिक तत्वों द्वारा असीम को धमकी भरे फोन भी किये गये थे और कहा गया था कि असीम को महाराष्ट्र आने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
• आलोक दीक्षित/फ़ेसबुक

शनिवार, 13 अक्टूबर 2012

असीम

मैं मसखरा नहीं जो लोगों को हंसाऊं
देश का पहला कार्टूनिस्ट कलर्स टीवी चैनल के बिग बॉस में
असीम त्रिवेदी कलर्स टीवी चैनल के चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस सीज़न-६ में शामिल होने वाले देश के पहले कार्टूनिस्ट हैं। असीम का मानना है कि वह सबसे पहले एक आम आदमी हैं जो आड़ी-तिरछी रेखाओं से आकृतियां रचकर सच कहने की कोशिश करता है। यह सच कहते रहने की कोशिश बिग बॉस में भी जारी रहेगी। एक कार्टूनिस्ट के रूप में वे हमेशा उद्देश्यपूर्ण ढंग से अपना काम करते रहेंगे। कार्टूनिस्ट असीम का कहना है कि वह कोई मसखरा या जोकर नहीं है जो राह चलते लोगों को मनोरंजन करे। वह बिग बॉस में भी लोगों के भीतर भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने का जोश भरते रहेंगे।

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

श्रद्धांजलि

कार्टूनिस्ट कुट्टी की पहली पुण्य तिथि 
सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट कुट्टी की पहली पुण्य तिथि के अवसर पर उनका स्मरण करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने हेतु देश के लगभग हर हिस्से से कार्टूनिस्ट राजधानी दिल्ली आ रहे हैं।
केरल कार्टून अकादमी द्वारा आयोजित किये जा रहे इस विशेष कार्यक्रम में माननीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कार्टूनिस्ट कुट्टी को श्रद्धांजलि देते हुए सम्बोधित करेंगे। उल्लेखनीय है कि वे स्वयं कार्टूनिस्ट कुट्टी और उनके बनाए कार्टूनों के प्रशंसक रहे हैं। विशेष बात यह है कि कुट्टी साहब बंगला भाषा नहीं जानते थे लेकिन बंगला में छपने वाले दैनिक अखबार के लिए नियमित कार्टून बनाते थे। उनकी कार्टून कला के प्रशंसक अनगिनत हैं।
राष्ट्रपति भवन में २९ अक्टूबर, २०१२ को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में श्री प्रणब मुखर्जी को १११ कार्टूनिस्टों द्वारा बनाये गये उनके कार्टून-कैरीकेचर एक पुस्तक के रूप में भैंट किये जाएंगे। इस कार्टून-कैरीकेचर संकलन में कार्टूनिस्ट कुट्टी के कुछ कार्टून विशेष रूप से शामिल किए जाएंगे।
राजधानी के रायसीना रोड स्थित प्रेस क्लब परिसर में २७ से २९ अक्टूबर, २०१२ तक कुट्टी के कार्टूनों की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जा रही है।
• कार्टूनिस्ट चन्दर

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

कार्टून प्रदर्शनी





एसडी फड़नीस के कार्टूनों की प्रदर्शनी बंगलोर में 
देश-दुनिया के जानेमाने वरिष्ट कार्टूनिस्ट श्री एसडी फड़नीस के कार्टूनों की एक प्रदर्शनी  'फड़नीस के साथ हंसी' (लाफ़ विद फ़ड़नीस) इण्डियन इण्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स (आईआईसी) द्वारा बंगलोर में आयोजित की जा रही है। आप सभी कार्टूनिस्ट और कार्टून प्रेमी सादर आमन्त्रित हैं।
दिनांक 1 से 13 अक्टूबर, 2012 को (रविवार अवकाश)
•  इण्डियन इण्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स,
नं. १, मिडफ़ोर्ड हाउस, मिडफ़ोर्द गार्डन, ऑफ़ एमजी रोड, बंगलोर- ५६०००१ (कर्नाटक), भारत  Iफ़ोन +९१ ८० ४१७५८५४०, ९९८००९१४२८  ई-मेल-   e-mail: info@cartoonistsindia.com   वेबसाइट- www.cartoonistsindia.com
कार्टूनिस्ट एसडी फड़नीस 
भाषा, क्षेत्र या वर्ग की सीमाओं से परे कार्टूनिस्ट फड़नीस के मूक कार्टून घर-बाहर की रोजमर्रा की जिंदगी में हास्य खोज लाने में सक्षम हैं। वास्तविक चित्रण का आभास देने वाला उनका चित्रण सचमुच अनूठा और आनन्ददायक है।
एसडी फड़नीस के रूप में लोकप्रिय शिवराम दत्तात्रेय फड़नीस 29 जुलाई, 1925 को भोज, जिला बेलगाम में पैदा हुए थे। सर जे.जे.इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट, मुम्बई में उन्होंने अपनी औपचारिक कला शिक्षा प्राप्त की। वे भारत के एक जानेमाने कार्टूनिस्ट इलस्ट्रेटर है। उनके मूक कार्टून देश-दुनिया और भाषा की बाधाओं से परे हैं और बिना भेदभाव के सभी कार्टून प्रेमियों को आनन्द और प्रेरणा देने वाले हैं।
भाषा, क्षेत्र या वर्ग की सीमाओं से परे उनके मूक कार्टून घर-बाहर की रोजमर्रा की जिंदगी में हास्य खोज लाने में सक्षम हैं। वस्तविक चित्रण का आभास देने वाला उनका चित्रण सचमुच अनूठा और आनन्ददायक है।
उनके कार्य की प्रस्तुति ‘लाफ़िंग गैलरी’ दुनिया भर में 20 शहरों में 40 से अधिक वर्षों बड्मेंची उत्सुकता और रुचि के साथ देखी गयी है। 

कलाकार फ़डनीस के मूल बहुरंगी कार्टून इन प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किये गये हैं। इन वर्षों में ‘लाफ़िंग गैलरी’ हास्य के साथ एक किंवदंती बन गयी है और आगंतुकों ने इसे बहुत पसन्द किया है। ‘लाफ़िंग गैलरी’ भारत में पुणे, मुंबई, नयी दिल्ली, बंगलौर, हैदराबाद और विदेशों में न्यूयॉर्क तथा लंदन आदि में प्रदर्शित की गयी है।
‘चित्रहास’ शो के माध्यम से फ़ड़नीस वहां उपस्थित दर्शकों को कार्टून बनाने की प्रक्रिया समझाते रहे हैं। ९० मिनट के इस कार्यक्रम में वे काफ़ी कार्टून बनाते है। कार्टून प्रेमियों को भलीभांति समझाने के लिए वे अपने कार्टूनों का रंगीन स्लाइड शो भी कार्यक्रम में शामिल करते हैं। 
जहां ‘चित्रहास’ दुनिया भर में अनेक महानगरों में प्रस्तुत किया गया है, वहीं भारत के छोटे-बड़े शहरों मे भी प्रस्तुत किया गया है। क्लब और सांस्कृतिक संगठनों के लिए यह शो प्रस्तुत कराना काफ़ी पसन्द आया क्योंकि इसमें दृश्य-श्रव्य (ऑडियो-विज़ुअल) उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था खुद फ़ड़नीस की ओर से रहती थी जो उन्हें बहुत सुविधाजनक लगता था।
फड़नीस ने1952 के बाद से हर साल के लिए मराठी पत्रिका ‘मोहिनी’ के दीवाली विशेषाकों के कवर का डिजाइन किया है। उन्हें ‘इण्डियन इण्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स’ द्वारा जून 2001 में 'लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया।
उनके अनेक कार्टून मॉन्ट्रियल इंटरनेशनल सैलून द्वारा प्रकाशित और प्रदर्शित किये गये हैं। वे फ्रेंकफर्ट पुस्तक मेले में ‘भारतीय कार्टून’ प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए निमन्त्रित किये गये थे। उनके अनेककार्टून अमरीका और जर्मनी की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकशितहो चुके हैं।
उन्होंने शकुंतला से शादी की है और उनकी दो पुत्रियां हैं। वे पुणे में रहते है।

1951: ‘हंस’ पत्रिका पर पहला हास्य आवरण।
1952: ‘मोहिनी’ पत्रिका के दीवाली विशेषांक का पहला विनोदी आवरण।
1954: कमर्शियल आर्टिस्ट्स’ गिल्ड (सीएजी), मुम्बई द्वारा आउटस्टेण्डिंग एडीटोतियल अवार्ड प्रदान किया गया। 
1965: जहांगीर आर्ट गैलरी, मुंबई में उनके मूल रंगीन कार्य की पहली प्रदर्शनी आयोजित।
1966: नयी दिल्ली में आयोजित ‘लाफ़िंग गैलरी’ का पूर्व भारतीय राष्ट्रपति जाकिर हुसैन द्वारा उद्घाटन किया.
1970: उनके चुने हुए कार्टूनों की पहली पुस्तक प्रकाशित।
1987: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के राष्ट्रीय टेलीविजन पर एसडी 'फड़नीस के कार्यक्रम प्रसारित।
1997: ‘चित्रहास’ और ‘लाफ़िंग गैलरी’ की अमरीका और बिटेन की यात्रा। 
2000: सु. ला  गडरे मातोश्री पुरस्कार, मुम्बई।
2000: मार्मिक पुरस्कार, मुंबई।
2000: रवि परांजपे फाउंडेशन पुरस्कार, पुणे।

2001: इण्डियन इण्स्टीटुट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स , बंगलौर द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड।
2006: फ्रैंकफर्ट विश्व पुस्तक मेले में प्रदर्शनी 'भारत से कार्टून' में आमंत्रित भागीदार।
2011: टीवी चैनल आईबीएन लोकमत 'ग्रेट भैंट' श्रृंखला में साक्षात्कार (चित्रों के साथ)।
2011: ‘हंस’ प्रकाशन द्वारा पहला हंस पुरस्कार।
2011: 'जीवन गौरव पुरस्कार' इंटरनेशनल लॉजेविटी सेण्टर, भारत द्वारा।
2012: एसडी फड़नीस द्वारा लिखित पुस्तक ‘रेशतान’ (Reshatan) के लिए 'महाराष्ट्र साहित्य परिषद पुरस्कार'।
• टी.सी. चन्दर

रविवार, 30 सितंबर 2012

परहेज

अखबार और कार्टून
















मुद्दे की बात यह है कि हर अखबार-पत्रिका में एकाधिक कार्टून अनिवार्य रूप से छपने चाहिए। इसके लिए एक सजग पाठक और कार्टून प्रेमी होने के नाते के नाते आप जो अखबार लेते हैं उसे नियमित रूप से अलग-अलग कार्टूनिस्टों के बनाए अधिक कार्टून छापने के लिए पत्र लिखें, ई-मेल करें... लिखते रहें,करते रहें।

आज का अखबार देखा। कई बार सोचा कि विज्ञापन और पठनीय (?) सामग्री का अनुपात देखा जाए। २ रुपये से ४.५० रुपये में बदले हुए दिल्ली के दैनिक हिन्दुस्तान में आज २०+४ (मूवी मैज़िक- कुछ छोटे आकार के पृष्ठ)+१० (सर्च इंजन- वर्गीकृत/डिस्प्ले विज्ञापन)=३४ पृष्ठ हैं। कुल मुद्रित क्षेत्र (प्रिण्ट एरिया) है- लगभग ५६६८९२ वर्ग सेमी.। इसमें विज्ञापन ३३४७७.७ वर्ग सेमी क्षेत्र में छपे हैं, जब कि पठनीय (?) सामग्री २३२११.५ वर्ग सेमी. छपी है। इस तरह अखबार में लगभग ५९.०५ % विज्ञापन हैं और ४०.९५% सामग्री। यह सिर्फ़ एक अखबार के एक संस्करण की तस्वीर है।

पूरे अखबार में सम्पादकीय पृष्ठ पर एक कार्टून है। पहले पन्ने का पॉकेट कार्टून बन्द कर दिया गया है। भीतर एक कार्टून छपता है छपता है जो प्राय: गायब रहता है। फ़िल्म-टीवी और ऐसी ही तमाम सामग्री आवश्यक रूप से मौजूद रहती है- पाठकों की रुचि के नाम पर। रविवारीय अंक का पहले इन्तज़ार रहता थ, उसे प्राय: संजोकर रखा जाता था। और अब, रविवार को मैं सबसे पहले अपने अखबार के परिशिष्ट ‘मूवीमैज़िक’ को अखबार से निकालकर दूर रख देता हूं। एक पाठक के नाते मैं ऐसा कर सकता हूं।

क्या साधन सम्पन्न इस अखबार में देश के कुछ कार्टूनिस्टों के गैर राजनीतिक यानी पारिवारिक सामाजिक नहीं छापे जा सकते! कमोवेश यही हाल देश के अन्य छोटे-बड़े अखबारों का भी है। सभी ‘पाठकों की पसन्द’ की सामग्री छाप रहे हैं और पता नहीं इन्हें पाठकों की पसन्द पता कैसे चलती है?

मुद्दे की बात यह है कि हर अखबार-पत्रिका में एकाधिक कार्टून अनिवार्य रूप से छपने चाहिए। इसके लिए एक सजग पाठक और कार्टून प्रेमी होने के नाते के नाते आप जो अखबार लेते हैं उसे नियमित रूप से अलग-अलग कार्टूनिस्टों के बनाए अधिक कार्टून छापने के लिए पत्र लिखें, ई-मेल करें... लिखते रहें,करते रहें।

हो सकता है आपको लगे मैं स्वार्थी हूं और मैं अपनी बात थोप रहा हूं। बिल्कुल, मैं स्वार्थी हूं- कार्टून, कार्टून कला और कार्टूनिस्टों के हित में (इनमें मैं भी शामिल हूं) मुझे यह भी स्वीकार है! आप साथ हैं तो आप और हम मिलकर स्थिति बदल सकते हैं।

(ऊपर दिए आंकड़े अनुमानित हैं इन्हें मानक न मानें- बस थोड़ी जानकारी साझा करने के लिए सिर खपाई की गयी है।)

• कार्टूनिस्ट चन्दर

शिकायत बोल
कार्टून न्यूज़ हिन्दी

शनिवार, 29 सितंबर 2012

कार्टून प्रतियोगिता

जलवायु परिवर्तन और हिमालय
युवाओं के लिए विशेष कार्टून प्रतियोगिता
‘जलवायु परिवर्तन और हिमालय’ विषय पर १८-३५ वर्ष आयु वर्ग के लिए एक कार्टून प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है।
हर प्रविष्टि के साथ प्रतिभागी की आयु का प्रमाण पत्र, डाक का पूरा पता और फ़ोन नम्बर अवश्य होना चाहिए।  ‘जलवायु परिवर्तन और हिमालय’ विषय पर भेजी जाने वाली प्रविष्टि मूल रूप में भेजी जानी चाहिए और वह ए-३ आकार यानी २९.७x४२ सेमी. (ए-४ आकार- २९.७x२१ सेमी. का दुगुना) में होनी चाहिए। 
प्रविष्टि भेजने की अन्तिम तिथि- २५ अक्टूबर, २०१२
परिणाम- १ नवम्बर, २०१२
प्रविष्टियां इस पते पर भेजें-
The Organizing Secretary, Climate Change Informatics, CSIR-NISCAIR, Dr. K.S. Krishnan Marg, New Delhi-110012

गुरुवार, 27 सितंबर 2012

श्रद्धांजलि

कार्टूनिस्ट डॉ. सतीश श्रृंगेरी  का निधन
लोकप्रिय कन्नड़ कार्टूनिस्ट और आयुर्वेद चिकित्सक सतीश श्रृंगेरी का आज सुबह (२७ सितम्बर, २०१२ को) फ़ेंफ़ड़ों से जुड़ी संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। उनकी आयु केवल ४४ वर्ष थी। कला-कार्टूनकला में उनकी बचपन से ही रुचि रही। अभिनव रामानन्द हाई स्कूल (किग्गा), जो श्रंगेरी के निकट एक दूरस्थ गांव है, में पढ़ाई के दौरान उन्होंने ड्रॉइंग का खूब अभ्यास किया और बहुत से कार्टून-कैरीकेचर बनाए। उन्होंने कार्टून कला सिखाने के लिए भी प्रयास किया। वह श्री जगद्गुरु चंद्रशेखर भारती मेमोरियल कॉलेज, श्रृंगेरी, और एएलएन राव मेमोरियल आयुर्वेद कॉलेज, गडग में कॉलेज के दिनों के दौरान भी उन्होंने अपना जुनून जारी रखा। आयुर्वेद चिकित्सा में स्नातकोत्तर डॉ. सतीश ने स्वतन्त्र रूप से चिकित्सा कार्य शुरू करने से पहले कुछ समय एक शिक्षक के रूप में कार्य किया और एक दवा कंपनी के साथ एक वैज्ञानिक के रूप में भी उन्होंने काम किया। कर्नाटक के कन्नड़ दैनिक समाचार पत्र दैनिक ‘संयुक्त कर्नाटक’ के लिए डॉ. सतीश ने व्यंग्य और हास्य से सराबोर नियमित रूप से कार्टून बनाये। उन्होंने अपने बनाये कार्टूनों की प्रदर्शनी भी आयोजित की। उनके परिवार में माता, पिता, पत्नी, एक बेटा, एक भी और एक बहिन हैं। उनके व्यवहार और उनके काम को सदा याद रखा जाएगा। कार्टून न्यूज़ हिन्दी, केरल कार्टून अकादमी और इनसे सम्बद्ध कार्टूनिस्टों को उनके असामयिक निधन से बहुत दु:ख हुआ है। ईश्वर से प्रार्थना है कि वह उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे और सभी परिजन-मित्रों को यह दु:ख सहने की सामर्थ्य दे!
 टी.सी. चन्दर
डॉ. सतीश का कार्य देखने हेतु लिन्क पर क्लिक करें-
श्रृंगेरी कार्टून्स   कैरीकेचर इण्डिया   फ़ेसबुक
Shraddhanjali Dr DrSatish Sringeri 
Shocked to hear about the death of popular Kannada cartoonist Dr.Satish Sringeri, from his brother Raghupathi Sringeri. He was 44 and died due to lungs disease. In spite of his busy medical practice, he continued his love for cartooning art by drawing for Kannada dailies and magazines. We'll badly miss his cartoon pills.
कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य/फ़ेसबुक में

मंगलवार, 18 सितंबर 2012

आमन्त्रण

कार्टून/कैरीकेचर
प्रणब कार्टून व कैरीकेचर
प्रिय कार्टूनिस्ट बन्धु,
राजधानी दिल्ली में केरल कार्टून अकादमी द्वारा अक्टूबर, २०१२ में सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट कुट्टी की प्रथम पुण्य तिथि के अवसर पर उन्हें स्मरण करने हेतु एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में  आने के लिए देश के माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणब कुमार मुखर्जी ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। 
दो बरस पहले प्रधान मन्त्री श्री मनमोहन सिंह को भारतीय व विदेशी कार्टूनिस्टों द्वारा उन पर बनाये गये कैरीकेचर और कार्टूनों का संकलन भैंट किया गया था। इसी प्रकार भारत के प्रथम नागरिक को भी कार्टून अकादमी की ओर से पुस्तक के रूप में  कार्टून-कैरीकेचर का एक विशेष संकलन भैंट किये जाने का निर्णय लिया गया है। 
इस विशेष संकलन हेतु कृपया श्री प्रणब कुमार मुखर्जी को लेकर अपना बनाया हुआ कार्टून/कैरीकेचर (बड़े आकार व ३०० डीपीआई में) ३० सितम्बर, २०१२ तक अपने ताज़ा फ़ोटो और सम्पर्क विवरण के साथ अवश्य भेज दें। 
डाक व ई-मेल पता है- 
cartoonacademy@gmail.com
• SUDHEERNATH, (Cartoonist), 125, Bagbhan Apartment, GH/2, Sector-28, Rohini, Delhi - 110 042 
PRANAB CARICATURES and CARTOONS
श्री प्रणब मुखर्जी से मिले राजधानी के कार्टूनिस्ट (१ सितम्बर, २०१२)


रविवार, 9 सितंबर 2012

असीम गिरफ़्तार

समरथ कौ नहीं दोस गुसाईं... 
Cartoonist Aseem Trivedi arrested in Mumbai.

रविवार, 2 सितंबर 2012

कार्टूनिस्ट

राष्ट्रपति से मिले राजधानी के कार्टूनिस्ट
राजधानी के कार्टूनिस्टों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केरल कार्टून अकादमी के कार्यक्रम समन्वयक के नेत्रत्व में  भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी से राष्ट्रभवन में आज (०१/०९/२०१२) भैंट की। अधिकांश कार्टूनिस्टों ने राष्ट्रपति को अपने द्वारा बनाये कैरीकेचर-कार्टून भैंट किये। अपने ऊपर बने तरह-तरह कार्टून-कैरीकेचर देखकार कई बार उनके चेहरे पर अनायास ही मुस्कान आ गयी।
केरल कार्टून अकादमी ने स्वर्गीय कार्टूनिस्ट की पहली पुण्यतिथि (२२ अक्टूबर, २०१२) के अवसर पर उनके स्मरण का कार्यक्रम बनाया है जिसके अक्टूबर, 2012 के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में आयोजित होने की आशा है।  इस कार्यक्रम में आने के लिए उन्हें आमन्त्रित किया गया। कार्टूनिस्ट कुट्टी को लेकर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होने के वे इच्छुक हैं।
मलयालम भाषी केपीएस कुट्टी केरल निवासी थे और उनके कार्टून बंग्ला अखबार में छपते थे। उन्हें बंला भाषा नहीं आती थी और अखबार मालिक मलयाम नहीं जानते थे। आपको याद होगा आनन्द बाज़ार पत्रिका समूह की चर्चित साप्ताहिक हिदी पत्रिका `रविवार' के अन्तिम पृष्ठ पर ‘कुट्टी का कार्टून’ छपता था जिसे तमाम पाठक सबसे पहले देखा करते थे। उन्होंने लगभग सात दशक जो कार्टून बनाए उनमें से कई कार्टूनों के पात्र वर्तमान राष्ट्रपति भी बने। ९० साल की आयु में अमरीका में उनकागत वर्ष निधन हो गया था।
केरल कार्टून अकादमी के पूर्व सचिव और अभी कार्यक्रम समन्वयक कार्टूनिस्ट सुधीर नाथ के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिलने गये कार्टूनिस्टों के इस प्रतिनिधि मण्डल में वरिष्ठ कार्टूनिस्ट काक (प्रभासाक्षी), जयन्तो बनर्जी (हिन्दुस्तान टाइम्स), श्यामल बनर्जी (मिण्ट), चन्दर (कार्टूनपन्ना), जगजीत राणा (दै. जागरण), रोहनीत फ़ोर (इण्डियन एक्सप्रेस), सजीत कुमार (डेक्कन क्रॉनीकल), प्रसान्थ (भारतीय वर्तमान), शिजू जॉर्ज (स्वतन्त्र), मनोज कुरील (स्वतन्त्र) और सत्य गोविन्द (स्वतन्त्र) शामिल थे।
देखें- केरल कार्टून अकादमी   केरल कार्टून अकादमी   कार्टूनपन्ना  



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