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मंगलवार, 8 सितंबर 2015

सदाबहार

सदाबहार कार्टून
बंगलोर में एक वरिष्ट कार्टूनिस्ट एसडी फ़ड़नीस के सदाबहार कार्टूनों की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। यह र्काटून प्रदर्शनी ०५ से २६ सितम्बर, २०१५ तक लाफ़िंग गैलरी में आयोजित होगी। ’इण्डियन इण्स्टीट्यूट ऑफ़  कार्टूनिस्ट्स’ द्वारा एसडी फ़ड़नीस को  सन २००१ में  ’लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया था।
Displaying Phadnis-Exhibition.jpg
अभी प्राप्त जानकारी के अनुसार कान्तेश बादीगर की कार्टून प्रदर्शनी’वक्र किरन’ किन्ही कारणों से स्थगित कर दी गयी है।      
• वीजी नरेन्द्र, ट्रस्टी प्रबंध,
इण्डियन इण्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स, # 1, मिडफ़ोर्ड हाउस, मिडफ़ोर्ड गार्डन,
एमजी रोड, बंगलौर-560001
फोन: 080-41758540, मोबाइल: 9980091428
वेबसाइट: www.cartoonistsindia.com
ई-मेल: info@cartoonistsindia.com, cartoonistsindia@gmail.com
http://www.facebook.com/pages/Indian-Institute-of-cartoonists/249178643402

सोमवार, 27 जुलाई 2015

कलाम

कार्टून के पक्षधर कलाम नहीं रहे
सोमवार, २७ जुलाई को भारत ने एक और रत्न को खो दिया है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ.अब्दुल कलाम अब हमारे बीच नहीं रहे। पूर्व राष्ट्रपति व  वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दूल कलाम आईआईएम शिलांग में छात्रों को एक संबोधित करते अचानक हुए गिर गए थे। अंग्रेजी समाचार वेबसाइट दि क्विंट ने इस खबर की पुष्टि की है।  
द क्विंट के मुताबिक, बैथेनी हॉस्पिटल के सीईओ डॉ.जॉन सेलो ने फोन के माध्यम से बताया कि डॉ. कलाम का निधन हो गया है। 
बेथैनी हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर डेविड सैलो ने बताया कि शाम ७ बजे डॉ.कलाम को असपताल में इलाज के लिए लाया गया था। उन्होंने बताया कि डॉ.कलाम को बचाने की पूरी कोशिश की गयी। लेकिन उनकी जान नहीं बचायी जा सकी। शाम ७.४५ मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। 
डॉ.सेलो से जब मौत के कारणों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मौत के कारणों के बारे में कहना मुश्किल है लेकिन यह एक हार्ट अटैक की घटना हो सकती है।
कार्टून न्यूज़ हिन्दी की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!

त्र्यम्बक शर्मा, कार्टून पर हस्ताक्षर करते कलाम साहब और चन्दर
१. वैज्ञानिक कलाम का बचपन (कार्टून: चन्दर), २. जब कलाम ने कहा कि अखबार में पहले पन्ने पर ही छपें कार्टून (कार्टून: चन्दर), ३. इसी अवसर पर कार्टूनिस्ट चन्दर ने उन्हें कैरीकेचर भैंट किया। ४. कैरीकेचर और कलाम

बुधवार, 22 जुलाई 2015

टॉम मूरे

कार्टूनिस्ट मूरे नहीं रहे
टैक्सास (अमेरिका)। प्रख्यात कॉमिक्स आर्ची को वर्षों अपनी कलम से सजाने वाले कार्टूनिस्ट टॉम मूरे नहीं रहे। 86 वर्षीय मूरे ने अमेरिका के टेक्सास में अंतिम सांस ली। मूरे के बेटे का कहना है कि पिछले हफ्ते ही पिता को गले के कैंसर का पता चला था और उन्होंने इलाज न करवाने का फैसला लिया था।
उनका कहना था कि वह हमेशा छह माह का काम एडवांस में करके रखते हैं। जैसे क्रिसमस का अंक जून में ही बना लिया करते हैं। बीच स्टोरी तब बनाते हैं, जब खिड़की के बाहर बर्फ जमी होती है।
अमेरिकी नेवी में काम कर चुके मूरे ने कोरियाई युद्घ के दौरान कार्टून को अपनी कलम से कागज पर उतारा था। आर्ची कॉमिक्स 1941 से शुरू हुई थी, लेकिन मूरे ने इसकी बागडोर 1953 में संभाली। मूरे के बनाए आर्ची, एंड्र्‌यूज और उसके दोस्तों के कार्टून वाली कॉमिक्स की 1960 में पांच लाख कॉपी बिकी थी जो उस समय का रिकॉर्ड था। 1996 में एक अखबार से बातचीत में मूरे ने कहा था कि वह एक माह में एक कॉमिक बुक निकालते हैं। 

शनिवार, 20 जून 2015

चैप्लिन वर्ष

चार्ली चैपलिन लाइन्स
इनलाइन छवि 1
विश्व चार्ली चेप्लिन के जन्म की 125 वीं वर्ष पर 
फ़िल्मी जीवन में व्यंग्य की कथा के साथ-साथ 
उनकी स्क्रीन पर उपस्थिति का 100 वां वर्ष 
मनाने के लिए सन 2015 को चार्ली चैपलिन 
वर्ष के रूप में मना रहा है। 
इस हेतु हास्य रेखाओं के रचनाकार उन्हें 
श्रद्धांजलि देने के लिए हास्य गुरु चार्ली 
चैपलिन पर कार्टून और हास्य चित्र के साथ 
इस उपक्रम में शामिल हुए हैं। कुल 500 से 
भी अधिक वरिष्ठ पेशेवर, शौकिया 
और नवोदित कार्टूनिस्टों के साथ 
मुम्बई में चार्ली चेप्लिन के साथ 
पानी में तैर रहे हैं। इनमें से कुछ 
( लगभग 200) कार्टून एक विशेष 
पुस्तक में शामिल किए जाएंगे। 
‘चार्ली चैपलिन लाइन्स’ के रूप में 
सबसे पहले भारत में चार्ली चैपलिन वर्ष 
समारोह के हिस्से के रूप में 25-27 जून 
से NCPA मुंबई में कार्टून/करिकेचर प्रदर्शनी 
आयोजित की जा रही है। कृपया चयनित 
200 कार्टूनिस्टों सूची देखें। कार्टूनिस्ट 
के उत्साह भरे योगदान पर सभी का आभार। 
• कार्टूनिस्ट सुधीर नाथ  
(सचिव, चैपलिन भारत फोरम), 125, बाग़वान अपार्टमेंट्स, 
जी एच / 2, सेक्टर 28, रोहिणी, दिल्ली - 110 042 
फ़ोन 09968996870, 09868264230, 011-27822765 
http://www.facebook.com/cartoonistsudheernath  
http://cartoonistsudheer.blogspot.com/  




गुरुवार, 28 मई 2015

कार्टून गैलरी

कार्टून गैलरी की साल गिरह
इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स की कार्टून गैलरी की आठवीं सालगिरह ६ जून, २०१५ को मनाई जा रही है। इसी अवसर पर माया कामथ मेमोरियल पुरस्कार- २०१४ भी दिए जाएंगे। आप सादर आमन्त्रित हैं
वीजी नरेन्द्र, ट्रस्टी प्रबंधक, इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स, बंगलुरु, 
1, मिडफ़ोर्ड हाउस, मिडफ़ोर्ड गार्डन, एम.जी.रोड, बंगलूर 560001 
फोन: 080-41758540, मोबाइल: 9980091428 
वेब स्थल: www.cartoonistsindia.com 
ई-मेल: info@cartoonistsindia.com 
cartoonistsindia@gmail.com 
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Displaying Invite for Mail.jpg

बुधवार, 13 मई 2015

सम्मान

बीजी वर्मा का सम्मान
कार्टूनिस्ट बीजी वर्मा को  केरल कार्टून अकादमी और एर्णाकुलम प्रेस क्लब सम्मानित किया जा रहा है। वे कार्टूनिस्ट शंकर के प्रिय शिष्यों में से एक रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से शंकर की साप्ताहिक पत्रिका और सीबीटी पुस्तकों के माध्यम से कार्टूनिंंग के क्षेत्र में बहुत योगदान दिया। इसलिए उन्हें सम्मानित करना गौरव की बात है।
स्थान: एर्णाकुलम प्रेस क्लब 
दिनांक: 24/05/2015
समय: 3:30 आप सभी का स्वागत है।
सुधीर नाथ एनबी
सचिव, केरल कार्टून अकादमी
मो.: 09968996870 (दिल्ली) 
09495161130 (केरल) ता: केरल कार्टून अकादमी, सी /फ़ोटोगिफ़्ट, 28/440 बी ओ, अनघा, क्लब रोड, गिरि नगर, कोच्चि-682,020, केरल / भारत

गुरुवार, 7 मई 2015

विदेशी कार्टून

विदेशी कार्टून प्रदर्शनी
इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स, बंगलुरु की कार्टून गैलरी में 16 मई 2015 को विदेशी कार्टून प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। आप सादर आमन्त्रित हैं।
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वीजी नरेन्द्र, ट्रस्टी प्रबंधक, इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स, बंगलुरु, 
1, मिडफ़ोर्ड हाउस, मिडफ़ोर्ड गार्डन, एम.जी.रोड, बंगलूर 560001 
फोन: 080-41758540, मोबाइल: 9980091428 
वेब स्थल: www.cartoonistsindia.com 
ई-मेल: info@cartoonistsindia.com 
cartoonistsindia@gmail.com 
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गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

गोपलू

कार्टूनिस्ट गोपलू नहीं रहे 
जानेमाने कार्टूनिस्ट एस. गोपालन (गोपलू) का निधन हो गया। लगभग ६ दशकों तक उन्होंने अपने पाठकों को अपने बनाये कार्टून और चित्रों से मन्त्रमुग्ध किये रखा।
सन १९२४ में जन्मे एस.गोपालन (Gopulu) की २९ अप्रैल २०१५ की मृत्यु हो गयी। एक तमिल कार्टूनिस्ट-चित्रकार के रूप में उन्हें तमिल हास्य पत्रिका आनंद विकटन के लिए किये गये अपने काम के लिए जाना जाता है। 
१९२४ में तंजौर में जन्मे गोपालन ने गोपलू शहर में अपने प्रारंभिक वर्ष बिताये। उन्होंने कला के कुंभकोणम स्कूल में अध्ययन किया। १९४१ में, वह आनंद विकटन पत्रिका में एक नौकरी की तलाश में चेन्नई आये। वहां उनकी मुलाकात सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट 'माली' से हुई। वहाँ उन्हें पत्रिका के दीपावली विशेषांक के लिए चित्र बनाने को कहा गया। उनका काम देखकर माली ने पत्रिका में गोपलू को एक नौकरी का प्रस्ताव रखा। बात शायद दिसंबर १९४४ की है। लगभग बीस वर्षों के दौरान 1968 तक गोपलू ने पत्रिका के लिए राजनीतिक कार्टून, कवर डिजाइन, चित्र आदि विविध कार्य किये। गोपलू ने तिल्लाना मोहनम्बल (Thillana Mohanambal और वाशिंगटन तिरुमनम (Washingtonil Thirumanam) के रूप में लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों के लिए काम किया। उन्हें लेखक देवेन के साथ कॉमिक्स थप्परियम सम्बु (Thuppariyum Sambu) के लिए भी जाना जाता है। लेखक सावी (Saavi) के साथ उनकी १९५३-५४ में की गयी अजंता, एलोरा, दिल्ली, जयपुर, कलकत्ता आदि की यात्राएं भी अविस्मर्णीय हैं। १९७२ में गोपलू ने अपनी ही विज्ञापन एजेंसी ’एड वेव’ शुरू की। उन्होंने कहा कि तमिल पत्रिका कुंगमम (Kungumam) और सन टीवी का लोगो तैयार किया। बाद में वह विज्ञापन एजेंसी छोड़ दी और कल्कि,  अमुधासुरभि (Amudhasurabhi), विकटन और कुंगुमम (Kungumam) के रूप में पत्रिकाओं के लिए एक स्वतंत्र चित्रकार के रूप में काम करने लगे।
Gopulu मुरासोली पुरस्कार और एमए चिदंबरम चेट्टियार पुरस्कार प्राप्त हुए। २६ नवंबर, १९९१ को तमिलनाडु सरकार द्वारा कलाईममणि (Kalaimamani) का पुरस्कार दिया गया था। सन २००१ में में उन्होंने इण्डियन इण्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स (बंगलुरू) में (Indian Institute of Cartoonists, Bangluru) के उद्घाटन समारोह के हिस्से के रूप में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कार्टून न्यूज़ हिन्दी की ओर से नमन! भगवान उसकी आत्मा को शांति दे ... 






http://www.thehindu.com/fr/2005/05/20/stories/2005052000110300.htm

शनिवार, 8 नवंबर 2014

कार्टून-कैरीकेचर

आलोक निरन्तर के कार्टून-कैरीकेचर
इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स द्वारा गैलरी में १७-२९ नवम्बर, २०१४ (रविवार अवकाश) को आलोक निरन्तर के कार्टून-कैरीकेचर प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।
जानेमाने इतिहासज्ञ श्री राम चन्द्र गुहा १७ नवम्बर को प्रात: ११ बजे इस कार्टून-कैरीकेचर प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।
आप सभी आमन्त्रित हैं।
स्थान: भारतीय कार्टून गैलरी, नंबर १, मिडफ़ोर्ड हाउस, 
मिडफ़ोर्ड गार्डन, एमजी रोड, निकट बिग किड्स’ केम्प 
बिल्डिंग के पास, ट्रिनिटी सर्किल, बंगलूर -५६०००१  
• फोन: ०८०-४१७५८५४०, ०९९८००९१४२८ (080-41758540, 09980091428) 
• ईमेल: info@cartoonistsindia.com   cartoonistsindia@gmail.com
• वेबसाइट: www.cartoonistsindia.com  

मंगलवार, 4 नवंबर 2014

कार्टून प्रदर्शनी

कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग का एक पुराना फ़ोटो (हिन्दुस्तान टाइम्स) 

फ़ोटो: कार्टूनिस्ट चन्दर

सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

कार्यशाला

दो दिवसीय फाउण्डेशन कार्टून कार्यशालाएं
cw01.JPGइण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स २६ व २८ सितंबर तथा २५ व २६ अक्टूबर, २०१४ (शनिवार और रविवार) २ दिवसीय फाउंडेशन कार्टून कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है। इच्छुक प्रतिभागी  अपना नाम, डाक पता, उम्र, शिक्षा, व्यवसाय  विवरण भेज सकते हैं। आयु की कोई सीमा नहीं है।
स्थान: भारतीय कार्टून गैलरी, नंबर १, मिडफ़ोर्ड हाउस, 
मिडफ़ोर्ड गार्डन, एमजी रोड, निकट बिग किड्स’ केम्प 
बिल्डिंग के पास, ट्रिनिटी सर्किल, बंगलूर -५६०००१  
• फोन: ०८०-४१७५८५४०, ०९९८००९१४२८ (080-41758540, 09980091428) 
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बुधवार, 10 सितंबर 2014

वन्यजीवन कैरीकेचर

 रोहन चक्रवर्ती का एक आकर्षक चित्रण
वन्यजीवन के चित्र
इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स द्वारा १०१वीं कार्टून प्रदर्शनी ‘वाइल्डलाइफ़ द टूनी वे’ आयोजित की जा रही है। १३ से २७ सितम्बर २०१४ तक आयोजित होने वाली यह कार्टून प्रदर्शनी वन्य जीवन संरक्षण को समर्पित है।  
बंगलूर स्थित इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स (आईआईसी) की गैलरी में पहली बार रोहन चक्रवर्ती के वन्यजीवन से जुड़े कैरीकेचर प्रदर्शित किये जाएंगे। 
आप सभी कार्टूनिस्ट और कार्टूनप्रेमी सादर आमन्त्रित हैं।
प्रदर्शनी  
• दिनांक १३ से २७ सितम्बर २०१४ तक  
•  समय: प्रात: १०.०० से सायं ०६.०० बजे तक
• स्थान: इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स,
# 1, मिडफ़ोर्ड हाउस, मिडफ़ोर्ड गार्डन, 
एमजी रोड, बंगलूर-560001 (भारत)
• सम्पर्क: वीजी नरेन्द्र, प्रबन्धन ट्रस्टी,
फोन: ०८०-४१७५८५४० (080-41758540), मोबाइल: ०९९८००९१४२८ (09980091428)
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• ई-मेल: info@cartoonistsindia.com 
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सोमवार, 9 जून 2014

कार्टूनार्ट फ़ाउण्डेशन

कार्टूनार्ट फ़ाउण्डेशन का शुभारम्भ
राजधानी के प्रेस क्लब में ०८ मई, २०१४ को सायं कार्टूनिस्ट-कार्टून प्रेमियों कार्टून कला के प्रचार, प्रसार, प्रशिक्षण आदि के लिए योजना बनाकर कुछ करने को लेकर विचार-विमर्श किया। तय हुआ कि ’कार्टून आर्ट फ़ाउण्डेशन’ का शुभारम्भ किया जाए। नाम का प्रस्ताव शरद कुमार ने प्रस्तुत किया।
उपस्थित लोगों में अधिकांश १९८२-८३ बैच के ललित कला महाविद्यालय (नयी दिल्ली) के पूर्व छात्र थे। भारतीय मूल के अमरीकी नागरिक अरुण मोदी ने कहा कि कार्टून कला को एक विषय की भांति पढ़ाया जा सके, ऐसा प्रबन्ध हो। महारानी बाग पॉलिटेक्निक में व्याख्याता मधु शंकर ने कहा कि कार्टून कला पर विशेष रूप से अब बहुत ध्यान देने की जरूरत है।
कार्टूनिस्ट चन्दर ने कहा कि कार्टूनार्ट फ़ाउण्डेशन की शुरूआत कार्टून कला के प्रचार, प्रसार, प्रशिक्षण आदि के लिए एक अच्छा माध्यम बने, ऐसा मेरा प्रयास रहेगा। इस कार्य को जारी रखने के लिए सभी के सहयोग की आवश्यता बनी रहेगी।
इस अवसर पर अनिल मनन, सुधीर नगीना, दीपाली बोस, अनिल परगनिहा, शुभ्रा वर्मा, रजनी मनन, राजीव काकड़िया, किरण खुल्लर, गुरलीन आनन्द सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।
प्रस्तुति: विशाल कुमार

शनिवार, 7 जून 2014

कार्टून प्रदर्शनी



सौ वीं कार्टून प्रदर्शनी
इण्डियन कार्टून गैलरी में कार्टून प्रदर्शनी का विशेष आयोजन

शनिवार, 26 अप्रैल 2014

मोदी की कहानी

चित्रकथा मोदी की कहानी
कार्टून वाच पत्रिका का प्रकाशन कर रहे त्र्यम्बक शर्मा ने हाल ही में वाराणसी में वहाँ के महापौर राम गोपाल मोहले से 'मोदी की कहानी’  ( चित्रकार हुसैन ज़ामिन) शीर्षक चित्रकथा का विमोचन कराया।

मंगलवार, 28 जनवरी 2014

बहादुर

आबिद सुरती के “बहादुर” पर एक मीडिया हाउस का कब्ज़ा 
• पंकज शुक्ल
बातचीत के दौरान शाहरुख खान के दिल से छलक आई वो ख्वाहिश जो वो हिंदी सिनेमा के बादशाह होकर भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, शाहरुख बड़े परदे पर 'बहादुर' बनना चाहते हैं। जिनकी उम्र पैंतालिस पचास के आसपास होगी, उनको अपने बचपन के इंद्रजाल कॉमिक्स ज़रूर याद होंगे। एक रुपये की एक किताब मिलती थी और वो एक रुपया भी जुगाड़ना जतन का काम होता था। किराए पर तब 10 पैसे में मिला करते थे कॉमिक्सबहादुर। इंद्रजाल कॉमिक्स याद होंगेw तो फिर उनका एक किरदार ‘बहादुर’ भी याद होगा। ‘बहादुर’ यानी इसी नाम से बनी कॉमिक सीरीज का हीरो। बाप जिसका डाकू था, लेकिन उसने कानून के पाले में आने का फैसला किया। केसरिया कुर्ता, डेनिम की जींस। कॉमिक्स की दुनिया का पहला हिंदुस्तानी हीरो। दुनिया भर में वो आबिद सुरती के बहादुर के नाम से मशहूर हुआ। शाहरुख खान इस किरदार का चोला पहनकर बड़े परदे पर आना चाहते हैं। बोले, “बचपन में इसके बारे में खूब पढ़ा। पूरा कलेक्शन जमा करके रखा। अब मन किया कि इस पर फिल्म बनाई जाए तो इसके कॉपराइट नहीं मिल रहे।” शाहरुख खान जैसी हस्ती किसी किरदार पर फिल्म बनाना चाहे और उसके सामने ऐसी अड़चनें आ जाए कि वो भी न पार सकें तो मन में उत्सुकता तो जागती ही है। यहां से शाहरुख ने शुरू की कहानी मुंबई के वॉटरमैन की। ये वॉटरमैन और कोई नहीं, हमारे आपके अजीज़ आबिद सुरती साब ही हैं। जी हां, वही जिनके कॉमिक किरदार ढब्बू जी ने कभी धर्मवीर भारती तक पर उर्दू को बढ़ावा देने का इल्जाम लगा दिया था, और वो इसलिए कि ढब्बूजी धर्मयुग के पीछे के पन्ने पर छपते थे और लोग धर्मयुग खरीदने के बाद उसे पीछे से ही पढ़ना शुरू करते थे। आबिद सुरती के किरदार दुनिया भर में मशहूर हैं। उनकी लिखी कहानियां परदेस में हिंदी सीखने के इच्छुक लोगों को क्लासरूम में पढ़ाई जाती हैं। नाटककार भी वो रहे। फिल्मों में स्पॉट बॉय से लेकर लेखन तक में हाथ आजमाया। पेंटर ऐसे कि अगर एक ही लीक पकड़े रहते तो आज एम एफ हुसैन से आगे के नहीं तो कम से कम बराबर के कलाकार होते। आबिद सुरती मुंबई से थोड़ा दूर बसे इलाके मीरा रोड में अकेले रहते हैं। दोनों बेटे सैटल हो चुके हैं। एक का तो शाहरुख ने नाम भी लिया, किसी कंपनी में नौकरी लगवाने के सिलसिले में। आबिद की पत्नी अपने बच्चों के साथ हैं, और वो मीरा रोड में ही ड्रॉप डेड एनजीओ के नाम पर नलों से पानी टपकने के खिलाफ मुहिम चलाते हैं। पढ़ने में अजीब सा लग सकता है लेकिन कोई छह साल पहले अपने एक दोस्त के घर में लेटे आबिद सुरती को घर के बूंद बूंद टपकते नल ने सोने नहीं दिया। Brave-act1और, बस वहीं से ये ख्याल जनमा। हर इतवार आबिद अपना झोला लेकर घर से निकलने लगे। झोले में होती कुछ रिंचे, प्लास और वाशर। वो सोसाइटी के घर घर जाकर टपकते नल ठीक करने लगे। और, यहीं से शुरू हुई ड्रॉप डेड फाउंडेशन की। शाहरुख खान ने आबिद सुरती की इस मुहिम के बारे में किसी अखबार में पढ़ा और उन्हें एक लंबा एसएमएस भेज दिया। शाहरुख ने ये भी लिखा कि कैसे वो बचपन से 'बहादुर' के फैन रहे हैं। फैन मैं भी बचपन से 'ढब्बू जी' का रहा हूं। शाहरुख ने बस इस किरदार को बनाने वाले आबिद सुरती से मुलाकात की मेरी इच्छा को फिर से जगा दिया। आबिद सुरती की फ्रेंड लिस्ट में मैं शामिल रहा हूं और उनकी सालगिरह पर मुबारक़बाद भी भेजता रहा हूं। इस बार बात आगे बढ़ी। मैंने संदेश भेजा। उनका जवाब आया। पिछले इतवार हम मिले फन रिपब्लिक के पास एक रेस्तरां में। बातों बातों में ज़िक्र फिर से 'बहादुर' का निकला। 'बहादुर' के परिवेश के बारे में बताते वक्त 78 साल के आबिद सुरती के चेहरे की चमक देखने लायक थी। फिर जैसे ज़ोर का झोंका आए और लौ फड़फड़ाने लगे, वैसी ही बेचैनी के साथ बताने लगे, “शाहरुख से पहले कबीर सदानंद ने भी बहादुर पर फिल्म बनाने की प्लानिंग की थी। हमने इस किरदार को ट्रेडमार्क रजिस्टर्ड कराना चाहा। पर पता चला कि एक बहुत बड़े मीडिया हाउस ने 'बहादुर बाई आबिद सुरती' नाम का ट्रेडमार्क अपने नाम रजिस्टर्ड करा लिया है।” सुनकर बड़ा दुख हुआ। दूसरों के अधिकारों की दिन रात बात करने वाले मीडिया हाउस क्या ऐसे भी किसी कलाकार का हक मार देते हैं। कॉपीराइट कानून कहता है कि किसी कृति के बनाते ही उसका कॉपीराइट सृजक के नाम हो जाता है। उसका कहीं रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं। माने कि अगर कोई ढंग का वकील आबिद सुरती का मामला अपने हाथ में ले तो उनके बौद्धिक संपदा अधिकार उन्हें मिल सकते हैं। मुझे खुद एक हफ्ता लग गया इस बात को दुनिया के सामने लाने में। चाहता हूं उनकी लड़ाई लड़ूं। जितना बन सकेगा कोशिश करूंगा। क्या आप साथ देंगे? • साभार, लिन्क: http://mediadarbar.com/25705/trademark-registered-abid-surti-character-bahadur-by-a-media-house-without-any-authraizetion/

कार्टूनेचर फ़ीचर सेवा

कार्टून न्यूज़ हिन्दी झरोखा